Stirring Bird II पंछी

Stirring Bird II पंछी

(प्रस्तुति – वेद)

ऊपरवाले ने एक खूबसूरत सी दुनिया बनाई थी और उसने हम सबको यह तोहफा दिया की हम सब इस खूबसूरत दुनिया में रह सके । जितनी खूबसूरत उसने ये दुनिया बनाई थी उससे कई ज़्यादा खराब हमने इसके हालात कर दिए। हमने प्रकृति को ध्यान न रख कर उसको पूरी तरह से निचोड़ कर रख दिया है।  इसीलिए अगर अब हम सभी से ये ज़िंदगी का ख़ूबसूरत  तोहफा वापस ले लिया जाये  है तो हमें इस बात पर कोई आश्चर्य नहीं।  क्यूंकि शायद वो हम सभी को  इस दुनिया से निकाल, इससे ज़्यादा खूबसूरत  दुनिया में ले जाना चाहते  है। यह  उसी पंछी की ज उड़ते उड़ते न जाने कितनी साडी चीज़ों को  खो गया।

पंछी gallery of words

पंछी था उड़ता हुए यहां

जाने कहां खो गया

तंग इस दुनिया से आके

अच्छे जहां को वो गया

पर्दा है अब गिर चुका

नाटक शायद ख़तम हुआ

शोर अब थोड़ा सा कम है

मेला शायद ख़तम हुआ

निकला वो इन पेड़ों से 

इन्हीं नदियों से पानी पिया था

उड़ा वो इसी वादी में

यही उसने अपना जीवन जिया था

मिट्टी में अब वो मिल चुका 

घुल के उसमे कंचन हुआ

जुड़ा हुए वो दुनिया से 

अब खुद से उसका बंधन हुआ

 

 

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