मुझको कुछ कर जाने दो

मुझको कुछ कर जाने दो

 

मुझको कुछ कर जाने दो : ज़िंदगी में हर एक लम्हा ऐसा आता है ,जब हम अपनी ख्वाहिशों को पाने के लिए सब

कुछ करने को तैयार होते है। ज़िंदगी के हर पल में हर वक़्त को एक ऐसे नज़रिए से तोलते है , मापते है और हम

चाहते है की हम कुछ ऐसा कर दिखाए की मन को संतुष्टि मिले और शान्ति भी।

इंसान हर पल को बेहतरीन बनाने के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार रहता है। लम्हा बेहतरीन हो और दिल

में जज़्बा ,तो हम कुछ भी कर सकते है। हर मैदान फ़तेह कर सकते है। तो इसी जज़्बे को कायम रखें और दिल

को ख़ुशनुमा, और बताइये आपकी ज़िंदगी में कोई ऐसा लम्हा जो आपको आगे बढ़ने को कहता हो।

मुझको कुछ कर जाने दो

 

मुझको कुछ कर जाने दो….

हर दिल में एक जान है,
उस जान की बेरुखी को उड़द जाने दो…
इस सीने में एक आग है,
उस आग में खामियों को झुलस जाने दो…
दिल बेपरवाह नादान अपनों से,
इस नादानी को बचपने में,
बदल जाने दो….
एक जज़्बा है इस मन में,
उस जज़्बे की लगन लग जाने दो…
कुछ करने की ठानी है,
उस लगन को,
इस दिल में उतर जाने दो…
हाँ में बेहका मुसाफ़िर हूँ ,
मुझको उड़ जाने दो….
मुझको उचाइयां छू आने दो….
सपने जो मैंने देखे है,
उनको हक़्क़ीक़त के करीब आने दो….
उस नीले अम्बर में,
उचाईयों पर उड़द जाने दो…
सपनो को मेरे ज़हन से,
हक़्क़ीक़त में बदल जाने दो…
एक ही ज़िंदगी है,
इसको मुक्कमल हो जाने दो….
ज़िंदगी में मुझको,
कुछ कर जाने दो ..
दिल में एक आग है ,
उस आग को लौ में बदल जाने दो ..
उस लौ की गर्मी को बढ़ जाने दो ..
मुझे सपनो की उड़ान भर जाने दो…

4 thoughts on “मुझको कुछ कर जाने दो

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